झूठी ही सही इज़्ज़त है
झूठी ही सही इज़्ज़त है बचाओ यारों ,
कम से कम बहरों के सामने तो न गो यारों ,
इस मुल्क को वफादार भी सब सांप मिले ,
जहाँ नहीं मिलता पानी तक साफ़,
कैसे वहां इन्साफ मिले.
नस्लें भूखी हैं न जश्न मनाओ यारों ,
झूठी ही सही इज़्ज़त है बचाओ यारों .
Comments