आ बैठें दो पल और

आ बैठें दो पल और ,
कि कोई बात न रह जाये,
चंद लम्हों में बसर हो जाती है ये ज़िन्दगी,
जाया न करें इक पल भी,
कि अधूरी कोई मुलाकात न रह जाये,
क्या पता फिर ऐसी शाम आये न आये ,
कौन जाने ये दो पल कि बहार कब चली जाये,
हरियाले अपने आँचल को अभी,
कि फिर सूखे पात न रह जाये,
आ बैठें दो पल और,
कि कोई बात न रह जाये.........

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