कट गया ये दौर भी
कट गया ये दौर भी, कि शाम हो गयी,
बढती ही गयी मुद्दतें , उम्र तमाम हो गयी;
डूबे रहे हमेशा अपनी ही शह में,
और उबरे तो खुदगर्जी निजाम हो गयी;
हर चोट से मिलना हुआ कुछ इस तरह,
गम हुआ हमराह, बदनसीबी मकाम हो गयी;
इस सफ़र में खुद से मिलने का वक़्त न मिला,
अब साया भी हुआ गैर , हस्ती गुमनाम हो गयी;
बढती ही गयी मुद्दतें , उम्र तमाम हो गयी.............
बढती ही गयी मुद्दतें , उम्र तमाम हो गयी;
डूबे रहे हमेशा अपनी ही शह में,
और उबरे तो खुदगर्जी निजाम हो गयी;
हर चोट से मिलना हुआ कुछ इस तरह,
गम हुआ हमराह, बदनसीबी मकाम हो गयी;
इस सफ़र में खुद से मिलने का वक़्त न मिला,
अब साया भी हुआ गैर , हस्ती गुमनाम हो गयी;
बढती ही गयी मुद्दतें , उम्र तमाम हो गयी.............
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